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1 "हे यहोवा, मैं ने गहिरे स्थानों में से तुझ को पुकारा है!"
2 "हे प्रभु, मेरी सुन! तेरे कान मेरे गिड़गिड़ाने की ओर ध्यान से लगे रहें!"
3 "हे याह, यदि तू अधर्म के कामों का लेखा ले, तो हे प्रभु कौन खड़ा रह सकेगा?"
4 परन्तु तू क्षमा करनेवाला है? जिस से तेरा भय माना जाए।
5 "मैं यहोवा की बाट जोहता हूं, मैं जी से उसकी बाट जोहता हूं, और मेरी आशा उसके वचन पर है;"
6 "पहरूए जितना भोर को चाहते हैं, हां, पहरूए जितना भोर को चाहते हैं, उस से भी अधिक मैं यहोवा को अपने प्राणों से चाहता हूं।।"
7 इस्राएल यहोवा पर आशा लगाए रहे! क्योंकि यहोवा करूणा करनेवाला और पूरा छुटकारा देनेवाला है।
8 इस्राएल को उसके सारे अधर्म के कामों से वही छुटकारा देगा।।